Home कविताएं “कुछ अपनी कुछ तुम्हारी रोज़ की बातें “!

“कुछ अपनी कुछ तुम्हारी रोज़ की बातें “!

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[1]

‘दमदार  दुश्मन  के  सामने  हिम्मत  ही  पहचान  होती  है ,’
“कच्चे   धागे सरीखे  को साथी  बनाओगे ,तो  टूट  जाओगे “|

[2]

‘प्रेम का  अहसास  चाहिए  तो  अहंकार  की  दीवार  को  गिरा ‘,
‘सत्संग  का  दामन  पकड़  ‘, नम्र  बन  कर  जीना  सीख  ले ‘|

[3]

“घर  में  दीपक  प्रतिदिन  जलना  चाहिए ” !
‘अपने  घर  में  पूजा  करें  या  न  करें  पर  ‘दीपक’ प्रतिदिन  जलना  चाहिए’ ,
‘अग्नि’ कई नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त करती है जो  इर्दगिर्द  घूमती  हैं’ ,
‘ वातावरण  के  वायु  दोषों  को  सुधारती   है  व  ऊष्मा  को  जन्म   देती  हैं ‘,
‘ मन  प्रसन्न  रहता  है , ‘सुसंस्कारों  की  श्रंखला  अविरल  बहती  रहती  है “|

[4]

‘मंदिर  में  इन्सान  की  चलती  है’ ,’प्रभु  लाचार  दिखते  हैं ,’
‘ मन  ही  मंदिर  है  जहां  भगवान  की  कृपा  बरसती  है  ‘ |

[5]

‘ इंसान  भलाई  करने  की  बजाय  दूसरों  का  नुकसान  करने  में  लगा  है ‘,
‘दाता  !  ऐसी  कृपा  करो  – सभी  संसार  के  उद्धार  का  प्रयास  करने  लगें ‘|

[6]

‘अर्थ  [धन]  ही  सारे  अनर्थों  की  जड़  है’,पगला  गए  हैं  सभी’,
‘अब रिस्तों के अर्थ भूल गए हैं’ ,’सिर्फ अर्थ  का अर्थ  जानते  हैं ‘|

[7]

‘ सपने  चकनाचूर  हो  गए  तो ,घबराने  से  क्या  होगा ‘?
‘नया सपना देखना शुरू कर दो’,’इसी का नाम जीवन है ‘|

[8]

‘प्यार  का  प्याला’- ‘प्यासा’,’परस्पर  प्यार ‘ ‘प्यासा  है’,
‘नफरत का प्याला लबालब है ,”झूठ फैला है चारों तरफ ‘|

[9]

‘ऐसा कौन देहधारी है जिससे सभी प्रसन्न हों तथा जिसे सभी ने अच्छा कहा हो ,’
‘अतएव मत  सोचो तुम्हारे  बारे में  लोग क्या  सोचते हैं , रुष्ट  हैं  या  प्रसन्न  हैं’ ,
‘इसे कल्पना  समझ कर  सतत लक्ष्य  पर अपनी दृष्टि  को  केन्द्रित  करे रक्खो’ ,
‘सफलताओं के शिखर पर  पहुँचने की  आशा  प्रज्वलित रखना  बेहद  जरूरी है’ ‘|

 

 

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