Home कविताएं देशभक्ति कविता कंधे से कंधा मिला कर चलने की ज़रूरत है

कंधे से कंधा मिला कर चलने की ज़रूरत है

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हर छेत्र का आधार लूट-खसोट बन जाए , व्यवस्था जरूर बिगड़ेगी ,

जब हर छेत्र मे भ्रष्टाचार का बोलबाला हो , कैसे जिएंगे हम ,

पुरानी व्यवस्था और संचालन , सही निभाया ही नहीं गया यहाँ ,

गलत दिशा , अनुचित मार्गदर्शन ने देश व्यवस्था को चौपट कर डाला ।,

देर आयद द्रुस्त -आयद को चरितार्थ कर दो मेरे देश वासियों ,

ये भी मेरा वो भी मेरा , सब कुछ मेरे बाप का ‘अब तो कहना छोड़ दो ,

जीवन के हर छेत्र मे मैनेजमेंट कामयाब है तो सब कुछ ठीक है ,

काम अच्छा/ बुरा कुछ भी हो , सही संचालन ही कामयाब करता है ,

आज देश मे एक सपूत देश को सही राह पर ले जाता दिखाई देता है ,

सभी अपना सहयोग दो उसको , बस बाजुओं की ताकत बनो उसकी ,

जिन उलझनों से देश उलझा जा रहा है , उस तपस को अहसास करो ,

हर देशवासी से कंधे से कंधा मिला कर सही दिशा मे चलने की जरूरत है |

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