Home ज़रा सोचो “इस अंदाज़ से भी सोचिए जनाब “

“इस अंदाज़ से भी सोचिए जनाब “

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[1]

‘लिखे भाव मेरे जरूर  हैं परंतु ‘ ,’अनुमान  तुम्हें  ही  लगाना  होगा ,’
‘लोग हर  महफिल मे  गीत गाते  हैं ‘ , ‘ फिर  भी तन्हा  से  होते  हैं’ ,
‘जिस के दिल में तुम समा गए ,’ उनका  तो  क्या कहना  है जनाब ‘,
‘वो खुद भी गुनगुनाते हैं”उनको भी गुनगुनाने को मजबूर करते हैं’ |

[2]

‘फूल काँटों से घिरा होता है ‘,
‘फिर भी खिला रहता है’ ,
‘तुम मखमली गद्दों पर भी’ ,
‘बेचैनी से सोते हो ‘|

[3]

‘मंजिल पकड़ने में उलझनें आएंगी’ ,
‘थकान भी होंगी ,’
‘कदम दर कदम बढ़ता चल ‘, 
‘हीरा बन जाएगा तू “|

[4]

‘उचित-अनुचित की व्याख्या केवल अनुभव करता है ‘,
‘जीवन-बद्ध जीवन यात्रा करना भी अनुभव सिखाता है ‘,
‘गौरवमय जीवन जीने की कला भी अनुभव करता है ‘,
‘मरना निश्चित है मुस्कराता मर’ अनुभव ही बताता है ‘|

[5]

‘खेत  में  बीज  बो  कर  भूल  जायेँ ‘ ‘तो क्या पैदावार हो पाएगी ,’
‘किसी को प्यार करके भूल जाएँ’ ‘तो मुहब्बत जिंदा रह पाएगी’ ,
‘हर चीज को तवज्जो चाहिए’,’हर  फन  को  कलाकारी  चाहिए’ ,
‘हर लम्हा इजाफा नहीं होता कभी’,’सारा गुड’ गोबर बन जाएगा ‘|

[6]

“किसी  का  दिल  तोड़ना  है  तो  भला  पत्थर  उठाने  की  क्या  जरूरत  है” ,

“अपशब्दों  की  पूरी  बहार   है   इस  दुनियाँ   में “, “मारते  जाओगे  तो  दिल

चकनाचूर  होते  जाएंगे ” |

[7]

‘तुम क्या मुस्कराने लगी’ ,
‘मेरी सेहत खुदबखुद सुधरने लगी ‘,
‘अब लोग यह पुछते हैं मुझसे’ ,
‘कौन सी दवाई खाते हो ‘?

[8]

‘अपने अच्छे वक्त में कभी ,
‘किसी का बुरा मत करो ‘,
‘अक्सर बुरे वक्त में अपने भी ,
साथ छोड़ देते हैं ,संभल जाओ ‘|

[9]

‘आजमाते रहोगे,करोगे कुछ नहीं’ ,
‘तो रिस्ते टूट जाएंगे ‘,
‘जहां बात बनाने की गुंजाइश हो’ ,
‘रिस्ते वहीं ठहर जाते हैं ‘|

[10]

‘आओ वह वजह ढूँढे’ ‘हम क्यों मिले थे ‘
‘बेवजह मिलना-मिलाना होता नहीं कभी’ ,
‘आंखे बंद करके ख्वाब देखना शुरू कर दें’, 
‘शायद गुज़रा हुआ जमाना हाथ लग जाए “|

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