Home कविताएं प्रेरणादायक कविता ‘इंसानियत की पहचान कर ‘ |

‘इंसानियत की पहचान कर ‘ |

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‘बुलन्दियों  को  छू  लिया  तूने ‘ , मगर ‘ इंसानियत  को  त्याग  कर ‘,

‘क्या   किया   तूने’  ‘सिर्फ   गर्त   में   जाने   का   रास्ता   चुन  लिया ‘ ,

‘ इंसानियत   का   पंख   लगा   कर ‘ ‘अगर  तू  मंजिल  पर  जा  चढा’ ,

‘तुझे  गर्त   में   मिलाने   से  पहले’ , ‘खुदा  भी’  ‘अनेकों   बार   सोचेगा ‘ |

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