Home कहानी प्रेरणादायक कहानी “आत्मसम्मान” और “आत्मविश्वास” के सामने नत-मस्तक हूँ मैं !

“आत्मसम्मान” और “आत्मविश्वास” के सामने नत-मस्तक हूँ मैं !

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किसी   कोठी   के   गेट   पर   पङी   गाय   को   खिलाने   वाली   दो   रोटी   उस   मैले कुचैले   बच्चे   ने   उठा   ली   है   !   मुस्करा   रहा   है   वो ,  संतुष्ट  है , लगता   है जैसे   पगले   ने   अरबों   की   दौलत   कमा   ली   है  !

बहुत   छोटी   सी   सुकुमार   उम्र ,  पर   आँखे   भीतर   को   धँसी   हुई   हैं   ! फटी अद्धी   शर्ट   पैंट   देह   पर   बेतरतीब   लटकी   नहीं   फँसी   हुई   है  !

मैने   सोचा   वो   पगला   भूखा   होगा   रोटी   मिली   है   शायद   अभी   बैठ  कर खाएगा !

लेकिन   ये   क्या   वो   तो   रोटियाँ   झोले   में   रख   रहा   है   ना   जाने   कहाँ       ले   जाएगा   ?   मेरा   मन   बस   इसी   प्रश्न   का   उत्तर   जानने   हेतु   उत्सुक      था  !

बरबस   ही   मुख   से   “ओय”   निकल   गया   और   वो   डरा-डरा   सा   मेरी   गाड़ी के   पास   खड़ा   था   !   वो   इतना   भयभीत  था   कि   उसका   पूरा   शरीर   कांप रहा   था   !   मैं   भी   उसकी   मनोदशा   को   भली   भांति   भाँप   रहा   था !

मैंने   उससे   प्यार   से   पूछा — बेटा   इन   रोटियों   का   तुम   क्या    करोगे किसको   खिलाओगे   ये   रोटियाँ   और   खुद   भूखे   मरोगे   ?

पता   नहीं   कौन   सा   दर्द   भरा   था   उसके   अन्दर   फफक   कर   रो   दिया  !

“साहब   घर   मे   एक    साल   भर   की   बहन   है   और   परसो   मैने   माँ   को    खो   दिया   !

हे   ईश्वर  !  हे   महाकाल  !  ये   नन्हा   कितना   जिम्मेदार   कितना   दिलेर   है  । लोग   मानते   नहीं   हैं   भगवान   पर   आपके   घर   में   भी   अंधेर   है  !

कुछ   सोच  कर  50  का   एक   नोट   निकाल  कर  उसको   देने   लगा   !

वो   बोला  —  ना   साहब   !   अगर   भीख   मांग  कर  गुड्डी   को   खिलाया   तो क्या   खिलाया   ?

इतना   कह  कर   वो   आत्म -सम्मान   से   मानो   थोड़ा   सा   अकड़   गया  !

मुझे   वहाँ   विस्मित  , चिंतित  ,  ठगा   सा   छोड़   वो  गरीब  आगे  बढ़  गया  !

मैं   मन   ही   मन   में   उसके   आत्मसम्मान   व   आत्मविश्वास   के  आगे नतमस्तक   हो   गया !

यही   आत्मविश्वास   हर   मनुष्य   को   उन्नति   के   पथ   पर   अग्रसर   करने   के लिए   संजीवनी   का   कार्य   करता   है … !!

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