Home राजनीति ‘आज सियासत ‘ ‘शासन का अपहरण उद्योग लगता है’ |

‘आज सियासत ‘ ‘शासन का अपहरण उद्योग लगता है’ |

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‘सियासत  के  मलबे  में  दुर्गंध   ऐसी ‘, ‘शौकीनों  की  नाक  पर  भी  रुमाल   है’  ,

‘गला  फाड़  कर”एक-दूसरों  की  कलई  खोलने  में’ ‘शर्म  नाम  की  चीज  नहीं’ ,

हाय ! ‘राष्ट्र  की  किस्मत  में  ऐसे  लोग’, ‘जो  लोक-लज्जा  छोड़  धन  लोलूप  हैं ‘

‘ये शासन का अपहरण उद्योग नहीं’,तो ‘क्या इसे राष्ट्र-‘हित  का पर्यायवाची कहें’ |

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