Home जीवन शैली आओ ‘प्रेम ‘ को अपनाएं ,’ घ्रणा ‘ को पनपने न दें !

आओ ‘प्रेम ‘ को अपनाएं ,’ घ्रणा ‘ को पनपने न दें !

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“अदभूत  हैं  लोग  जो’  ‘दूसरों   की   भूल   पर   क्रोध   करते   हैं ‘ ,

‘क्योंकि   भूल   दूसरा  करता  है ‘ और ‘  दण्ड  स्वम  को  देते   हैं ‘,

‘दूसरा  आपको  गाली  दे ‘, ‘क्रोध  में  आप  जलते  हैं’ , ‘राख  होते  हैं’ ,

‘क्यों  न’- ‘ संकुचित  विचारधारा  को त्यागें’, ‘उदार  दृष्टिकोण  बनाएँ ‘,

‘उदार वृत्ति  वाला व्यक्ति ‘ , ‘घटनाओं  को  कभी  दिल  से  नहीं  लगाता ‘,

‘जहां  समभाव है  वहाँ  जीवन  है ‘ ,  ‘जहां  आपसी  मतभेद  है  वहीं  मृत्यू  है’ ,

‘प्रेम  सदा  विस्तार देता  है ‘ और  ‘स्वार्थ ‘  ‘मतभेदों   को  जन्म  देता  है ‘,

‘आओ  आगे  बढ़ें’ ,’ प्रेम  को  अपनाएं ‘ , ‘घ्रणा ‘  को ‘ पनपने  न  दें  कभी ‘  |

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