अमृत वाणी —

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{1}

‘जिंदगी   जब  देती  है’  तो  ‘अहसान  नहीं  करती ‘ ,

‘और  जब  लेती  है  तो ‘ ‘ कोई  लिहाज  नहीं  करती ‘|

{2}

दुनियाँ  में  दो  पौधे  ऐसे  हैं  जो  मुरझाने  नहीं  कभी ‘,

‘और  अगर  मुरझा  गए  तो  उसका  कोई  इलाज़  नहीं’ :-

पहला —-”  निःस्वार्थ   प्रेम  “

दूसरा ___” अटूट   विश्वास  “

{3} 

‘ईश्वर ‘  ‘मेरे   बिना  भी  ईश्वर   है  मगर ‘,

‘ मैं ‘ ‘ईश्वर    के   बिना ‘  ‘कुछ   भी   नहीं  ‘  |

{4}

“माना  दुनियाँ  बहुत  बुरी  है” , “सब  जगह  धोखा  है” ,

“लेकिन  हम  तो  अच्छे  बनें “, “हमें  किसने  रोका  है ” |

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