Home कविता अपनी प्रसंशा की कामना मत कर

अपनी प्रसंशा की कामना मत कर

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‘अपनी   प्रसंशा   की   कामना   मत   कर ‘, ‘ दूसरों   की  प्रसंशा   करनी  सीख  लो ,

‘सज़ा  मत  दो  किसी   को ‘, ‘छमा  करने  की  प्रवत्ति’ , ‘इंसान  को  महान  बनाती  है ‘|

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