Home कोट्स Motivational Quotes ‘अच्छे प्राणी’ के ‘कडुवे बोल’ भी ‘अमृत’ का काम करते हैं | जरा सोचो |

‘अच्छे प्राणी’ के ‘कडुवे बोल’ भी ‘अमृत’ का काम करते हैं | जरा सोचो |

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जरा सोचो
‘इंसान’  आसानी  से  ‘चुप’  नहीं  रहता  अच्छा/ बुरा  कुछ  भी  करे, ‘करता  है’,
‘समय  का  दुष्चक्र’ जब  घूमता  है, ‘बुराई  का  प्रतिबिंब’  बना  देता  है  उसको !

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जरा सोचो
‘बोले  शब्द’  जब  ‘जहरीली  नागफनी’  से  भी  ‘ कठोर ‘  होते  हैं,
‘आंसू’ नहीं  बहते, न ‘जुबान’ खुलती  है, बस ‘जिंदा लाश’ होते  हैं !

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जरा सोचो
‘अच्छे  प्राणी’  के ‘कड़वे  बोल’  भी ‘दवा’  का  काम  कर  जाएंगे,
‘बुरे’  के  ‘मीठे  बोल’  भी ‘जहर’  उगलेंगे,  ‘बीमार’  बन  जाएंगे !

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जरा सोचो
‘ बतियाते ‘  रहिए ,’ बंद  घरों  में ‘  सदा  ‘ जाले ‘  लगते  देखे  हैं ,
बीच  में ‘मुस्कुराना’  मत  भूलना, समय ‘यादगार’  बन  जाएगा !

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जरा सोचो
रिश्तेदारी, आपस दारी ,समझदारी, सब  कुछ  हवा  होने  लगे  हैं  आजकल,
कुसंस्कारों  का जमाना  है, संस्कारों  की  विधा देश  से स्थगित  हो  गई  शायद !
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जरा सोचो
यदि  किसी  की  ‘लगन’-  बेजोड़ , अनुपम , और  अनूठी  है,
‘परिणाम’ सुखदाई  ही  होंगे, ऐसे ‘प्राणी’  को  सादर  प्रणाम !
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जरा सोचो
हमारा  ‘ दोहरा  आचरण ‘-  मूल्य  हीनता , प्रतिस्पर्धा ,  स्वार्थ  और  द्वेष ,
‘नकली  और  बनावटी’ ‘चेहरा’ दिखाता  है, ‘आईना’  चटका  सा  लगता  है !
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जरा सोचो,
‘चाहत’  हो  या ‘राहत’,  अक्सर  ‘अपने’ ही  प्रदान  करते  हैं,
बिना  रुठे – उनके  घर ‘ मुस्कुराहट ‘  भेज  देनी  चाहिए  !
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जरा सोचो
‘जीतने  वाले’  भी  कई  बार  अपनों  से  ‘हार’  जाते  हैं  क्योंकि,
कभी  ‘बातें’  चुभी , कभी ‘ लहजा ‘, ‘ कलेजा ‘  फाड़  जाते  हैं !
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