Home कविताएं प्रेरणादायक कविता अकेले और हम की विरासत

अकेले और हम की विरासत

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*अकेले हम बूँद हैं,*
*मिल जाएं तो सागर हैं।*
*अकेले हम धागा हैं,*
*मिल जाएं तो चादर हैं।*
*अकेले हम कागज हैं,*
*मिल जाए तो किताब हैं।*
*अकेले हम अलफ़ाज़ हैं,*
*मिल जाए तो जवाब हैं।*
*अकेले हम पत्थर हैं,*
*मिल जाएं तो इमारत हैं।*
*अकेले हम दुआ हैं,*
*मिल जाएं तो इबादत हैं।*

*संस्कारों से बड़ी कोई*
*वसीयत नहीं….*
*और*
*ईमानदारी से बड़ी कोई*
*विरासत नहीं…!*
*आप सभी का दिन शुभ एंवम मंगलमय हो सुप्रभात*

{  सौजन्य  से  }

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